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    (सम-सामयिक विषयों की मासिक पत्रिका, RNI No.-50756)

    Tuesday, 7 March 2017

    माओवादियों से संबंध रखने के मामले में जी.एन.साईबाबा सहित 5 को उम्रकैद



    माओवादियों से संबंध रखने के मामले में जी.एन.साईबाबा सहित 5 को उम्रकैद

    दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज का  अङ्ग्रेज़ी विषय का प्रफेसर जी.एन. साईबाबा, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का छात्र हेम मिश्रा और पूर्व पत्रकार प्रशांत राही तथा दो अन्य को गढ़चिरौली न्यायालय ने माओवादियों से संपर्क रखने और भारत के खिलाफ षडयंत्र रचने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
    भारत में बढ़ते हुए भीतरघात को उजागर करने वाला यह ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय है।
    वहीं, छठे आरोपी विजय तिर्की को 10 साल की सजा सुनाई गई है। आजीवन कारावास की सजा पाने वालों में महेश तिर्की और पांडु नरोट भी शामिल हैं।

    कोर्ट ने साईबाबा और पांच अन्य को भारत के खिलाफ युद्ध का षडयंत्र रचने का दोषी पाया है। साईबाबा दिल्ली यूनिवर्सिटी के राम लाल आनंद कॉलेज का प्रोफेसर था। यह व्यक्ति शरीर से नब्बे पार्टीशत विकलांग है, नाम इस का इसका साई है किन्तु करतूत, देश विरोधी। शारीरिक विकलांगता के आधार पर नौकरी प्राप्त साई उसी थाली में छेद कर रहा था जिससे उसे रोटी हासिल होती थी।
    जज एस.एस. शिंदे ने सभी आरोपियों को अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रीवेन्शन) ऐक्ट की धारा 13,18,20, 38 और 39 का दोषी पाया है।

    अभियोजन पक्ष के वकील प्रशांत शाठीनादन ने इसी ऐक्ट की धारा 20 के तहत सभी को आजीवन कारावास की सजा की मांग की थी। उन्होंने दलील दी थी कि भले ही साईबाबा शारीरिक रूप से अक्षम हैं और व्हीलचेयर के सहारे रहता है, लेकिन उसे सजा में छूट नहीं मिलनी चाहिए।
    साईबाबा पिछले साल जून से जमानत पर रिहा किया गया था। वहीं, मिश्रा और राही को अगस्त और सितंबर 2013 को क्रमशः अहेरी और छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया गया था। साईबाबा को 9 मार्च 2014 को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए थे, जिनसे यह प्रमाणित हुआ कि वह देश विरोधी गतिविधियों में शामिल था और अपनी विकलांगता की आड़ में नक्सलियों की मदद करता था।

    छत्तीसगढ़ की गढ़चिरौली कोर्ट ने साईबाबा और जेएनयू स्टूडेंट हेम मिश्रा समेत 6 आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) एक्ट की धारा 13, 18, 20, 38, 39 और आईपीसी की धारा 120 B के तहत दोषी करार दिया था। प्रोफेसर साईबाबा पोलियो से ग्रसित है और उसका 90 फीसदी शरीर अक्षम है। पुलिस ने उसपर प्रतिबंधित संगठन भाकपा-माओवादी का कथित सदस्य होने,  उन लोगों को साजोसामान से समर्थन देने और भर्ती में मदद करने के आरोप लगाया था।

    लाल सलाम के साथ देश को विखंडित करने वाले तत्व, अभी अपने प्रयास में हारे नहीं है। किन्तु राष्ट्र और समाज को इस तरह के भीतरघातियों से कड़ाई से निपटने की आवश्यकता है......

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