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    Saturday, 4 March 2017

    इलाहाबाद अपराध : चैंबर में घुसकर डॉ.बंसल को गोली से उड़ाया

    इलाहाबाद अपराध : चैंबर में घुसकर डॉ.बंसल को गोली से उड़ाया

    शहर के विख्यात लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. एके बंसल की बृहस्पतिवार देर शाम जीवन ज्योति हॉस्पिटल स्थित उनके चैंबर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। डॉ.बंसल मरीज देख रहे थे तभी एक बदमाश ने चैंबर में घुसकर करीब से उनके सिर पर पिस्टल से गोलियां मारीं। फिर वह बाहर निकल साथी बदमाश संग फरार हो गया। खबर मिलते ही आला अधिकारियों समेत शहर के तमाम डॉक्टर हॉस्पिटल पहुंच गए। एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी। डॉक्टर के भाई प्रवीण बंसल की तहरीर पर कीडगंज थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस लिखा गया है। डीएम के आदेश पर डॉक्टरों की एक टीम बनाकर डॉक्टर बंसल के शव का पोस्टमार्टम किया गया।
    घटना बृहस्पतिवार देर शाम करीब पौने सात बजे की है। बाई का बाग स्थित जीवन ज्योति हॉस्पिटल के संचालक डॉ.एके बंसल कुछ ही देर पहले अपने चैंबर में आए थे। वह मरीजों को देख रहे थे तभी एक बदमाश दरवाजा खोलकर चैंबर में घुसा और बेहद करीब से डॉक्टर के सिर पर पिस्टल से फायर कर दिए। फायरिंग के बाद वह फौरन बाहर निकलकर भाग गया। सिर में गोलियां धंसने पर खून से लथपथ डॉ.बंसल कुर्सी पर लुढ़क गए।

    फायरिंग से हॉस्पिटल में अफरातफरी मच गई। कुछ देर बाद कर्मचारी और डॉक्टर जुटे तो डॉ.बंसल को उठाकर ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। खबर पाकर एसएसपी शलभ माथुर और एसपी सिटी विपिन टाडा समेत कई सीओ पुलिस बल के साथ पहुंच गए। कुछ देर बाद डॉ.बंसल को लाऊदर रोड स्थित कृति स्कैनिंग सेंटर ले जाकर एक्सरे तथा सीटी स्कैन कराया गया। पहले चर्चा थी कि उन्हें पीजीआई लखनऊ ले जाएगा लेकिन फिर उन्हें जीवन ज्योति वापस लाया गया जहां शहर के कई नामचीन सर्जन उनके सिर से गोलियां निकालकर ब्लीडिंग रोकने की कोशिश में जुट गए। इस बीच शहर भर से डॉक्टर के करीबी लोग, रिश्तेदार तथा व्यापारी भी आ गए।

    डॉ. बंसल पर जानलेवा हमले की जानकारी पाकर आईजी जोन, डीआईजी रेंज, एसपी क्राइम भी पहुंच गए। एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट और क्राइम ब्रांच ने  फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर छानबीन शुरू कर दी। खोजी कुत्ता भी लाया गया। वह हॉस्पिटल के पिछले रास्ते पर गया जिधर शूटर भागे थे। चैंबर में फर्श से प्वाइंट 32 बोर के चार खोखे पुलिस ने कब्जे में लिए। गेट और चैंबर के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक की। इसी बीच रात करीब साढे़ दस बजे सर्जरी में जुटे डॉक्टरों ने डॉ.बंसल को मृत घोषित किया तो कोहराम मच गया। डॉ.बंसल के परिजनों और रिश्तेदारों के साथ डॉक्टर और हॉस्पिटल के कर्मचारी रोने-बिलखने लगे।

    देर रात पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि फिलहाल इस सनसनीखेज वारदात की वजह और कातिलों का पता नहीं चल सका है। डॉ.बंसल से जुड़े विवादों और उनसे दुश्मनी रखने वाले लोगों की छानबीन की जा रही है। वारदात के तरीके से तय है कि गोलियां किसी शार्प शूटर ने मारी हैं। फिलहाल अनुमान है कि किसी गिरोह को सुपारी देकर ड़ॉ.बंसल का कत्ल कराया गया है। एसपी सिटी विपिन टाडा ने बताया कि भाई प्रवीण ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कराया है।

    डॉ.एके बंसल और उनकी पत्नी डॉ.वंदना बंसल कई हॉस्पिटल का संचालन करते थे। करोड़ो रुपये की मिल्कियत है जिससे उन पर अपराधियों की नजर रही है। एक एंगल यह है कि मोटी रंगदारी देने से इनकार पर किसी अपराधी गिरोह ने यह वारदात की।
    -डॉ.बंसल का सीतापुर में महर्षि विश्वविद्यालय को लेकर कुछ लोगों से कई करोड़ रुपये का विवाद बना था। उन्होंने छह लोगों पर केस भी दर्ज कराया था। कत्ल के पीछे इस विवाद पर
    -उन्हें कई बार मरीजों के तीमारदारों से भी धमकी मिली थी। यह पहलू है तो कमजोर मगर इस पर भी छानबीन की जा रही है।

    एमएलसी बनने की थी डॉ. बंसल की ख्वाहिश

    पांच रोज पहले अपने ही चैंबर में शूटर की गोलियों का शिकार हुए जीवन ज्योति हॉस्पिटल ग्रुप के निदेशक डॉ.एके बंसल की बढ़ती महत्वाकांक्षाएं धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। इधर कुछ बरसों से चिकित्सीय पेशे से ज्यादा प्रापर्टी कारोबार में ध्यान दे रहे डॉ.बंसल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी हिलोरें ले रही थी। करीबी लोगों से बातचीत में मालूम हुआ कि वह राज्यसभा सदस्य या एमएलसी बनने का ख्वाब देख रहे थे। इसके खातिर वह राजनीतिक पार्टियों के संपर्क में थे और खासतौर से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने का मौका तलाशते रहते थे। इस ख्वाहिश को पूरी करने के लिए वह पानी की तरह पैसा बहा रहे थे। मुख्यमंत्री समेत सपा नेताओं की सभाओं तथा रैलियों में वह बड़े स्तर पर संसाधन मुहैया कराते थे।
    अपने पेशे में नाम और दौलत कमाने के बाद पिछले कुछ सालों से डॉ.एके बंसल रीयल एस्टेट समेत दूसरे कारोबार में ज्यादा ध्यान देने लगे थे। इलाहाबाद से लेकर वाराणसी, लखनऊ, सीतापुर, नोएडा तक उन्होंने प्रापर्टी में करोड़ों रुपये लगा दिए थे। इस धंधे में नफा-नुकसान के बीच वह राजनीतिक में भी हाथ आजमाना चाहते थे। इसी वजह से वह भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य और सपा नेता रेवती रमण सिंह समेत कुछ और नेताओं के करीब आते गए थे। डॉ.बंसल के साथ रहने वाले एक बेहद करीबी शख्स ने बताया कि वह समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद या फिर एमएलसी बनने की चाहत रखते थे।

    पिछले साल एमएलसी चुनाव से पहले वह इस कोशिश में लगे थे कि उन्हें सपा से उम्मीदवार बनाया जाए। वह जानते थे कि एमएलसी की उम्मीदवारी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव या मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही दिला सकते हैं। इसी वजह से इलाहाबाद समेत आसपास के जनपद में मुलायम और अखिलेश की सभाओं की तैयारी में हर संभव सहायता उपलब्ध कराते थे।  औद्योगिक क्षेत्र के सड़वां और नैनी के दांदूपुर गांव में मुख्यमंत्री की सभाओं में डॉ.बंसल ने तमाम निजी गाड़ियों के अलावा अपने नर्सिंग कॉलेज की बसों और कई एंबुलेंस को लगाया था। कई सभाओं में वह रेवती रमण के जरिए मुख्यमंत्री से मिलकर बात करने में कामयाब हुए थे, हालांकि उनका एमएलसी बनने का सपना अधूरा रह गया।

    डॉ. बंसल के दोनों मोबाइल से कॉल रिकार्डर भी गायब

    जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. एके बंसल के कत्ल की जांच में एसटीएफ के अधिकारियों को मिले एक और तथ्य ने चौंका दिया है। पता चला है कि डॉ. बंसल के दोनों मोबाइल फोन में कॉल रिकार्डर थे लेकिन घटना के बाद चेक करने पर वे फोन में मिले नहीं। इससे पहले एक फोन से व्हाट्स एप का डाटा डिलीट होने की जानकारी सामने आ चुकी है। ऐसे में एसटीएफ के सामने सवाल है कि फोन के रिकार्ड गायब करने में किसी करीबी शख्स की गहरी साजिश तो नहीं?
    पिछले बृहस्पतिवार की शाम जीवन ज्योति हॉस्पिटल के चैंबर में डॉ. बंसल की हत्या के बाद जांच में जुटी एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने साजिश की तह में जाने के लिए कई पहलुओं पर छानबीन शुरू की तो डॉ. बंसल के दोनों मोबाइल फोन की तरफ ध्यान गया। एसटीएफ के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि डॉ. बंसल के दोनों मोबाइल फोन को चेक करने पर एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। डॉ. बंसल के साथ रहने वाले एक करीबी सहयोगी ने जानकारी कि उनके दोनों मोबाइल फोन में कॉल रिकार्डर ऐप इंस्टाल थे। करीब 15 दिन पहले तक तो दोनों मोबाइल में ये ऐप थे।

    अब घटना के बाद मोबाइल में कॉल रिकार्डर ऐप नदारद होने के पीछे किसी साजिश की आशंका के तहत छानबीन हो रही है। डॉ. बंसल तो इतना ध्यान देते नहीं थे। कॉल रिकार्डर ऐप भी उनके एक करीबी ने ही इंस्टाल किया था। फिर दोनों मोबाइल से यह ऐप हटाया किसने और क्यों, इस बारे में कोई भी नहीं बता पा रहा है। डॉ. बंसल के मोबाइल फोन से छेड़छाड़ कोई बेहद करीबी ही कर सकता है लेकिन वह कौन है, यह रहस्य बना है। इससे पहले व्हाट्स एप डाटा डिलीट होने का पता चला था। आखिर कौन है वो नजदीकी शख्स जो नहीं चाहता कि डॉ. बंसल के निजी राज जांच टीम के सामने उजागर हो सकें? इसके पीछे वजह क्या है? कत्ल के साजिश से इन राज का क्या ताल्लुक है? इस पर एसटीएफ के अफसर मंथन कर रहे हैं। अब तक की जांच में कत्ल के पीछे कोई ऐसा क्लू नहीं मिला है जिससे अंदरूनी वजह पर रोशनी पड़ती लेकिन ऐसी जानकारियां चौंकाने वाली हैं।

    यमुनापार के कई किसानों की गिरवी रखा ली जमीन

    जीवन ज्योति अस्पताल के निदेशक डॉ.एके बंसल के चिकित्सा पेशे से जुड़ा एक स्याह पक्ष भी है। उनके  खिलाफ बार-बार आरोप लगते रहे थे कि इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत हो गई, लेकिन बिल चुकता करने लिए शव को जबरन रोक लिया। इसी वजह से उनके खिलाफ बीस मुकदमे दर्ज हुए। इससे भी ज्यादा गंभीर बात ये सामने आई है कि बिल नहीं चुकता कर पाने पर तमाम मरीजों से जमीन और खेत गिरवी रखवा लिए थे, जिनमें ज्यादातर यमुनापार के गरीब किसान हैं।
    दस साल में जीवन ज्योति हॉस्पिटल में मरीज की मौत या भारी भरकम बिल को लेकर मारपीट और हंगामे की कम से कम सौ घटनाएं हो चुकी थीं। भारी बवाल के भी तकरीबन दस केस थाने पहुंचे, जिनमें एक वकील की भी मौत का मामला है। कई बार इसलिए बखेड़ा हुआ कि बिल जरूरत से ज्यादा था और किसी मरीज की मौत के बाद परिजनों ने बिल पर ऐतराज जताया तो शव रोक लिया गया। हॉस्पिटल से जुड़े कुछ लोगों से पता चला कि यमुनापार और पड़ोसी जिलों रीवा-सतना या सीधी से आए कई मरीज इलाज में बना लाखों रुपये का बिल नहीं चुकता कर सके तो उनसे डॉक्टर के किसी करीबी के नाम से स्टाम्प पर जमीन या मकान गिरवी रखवा दिया गया।

    बताया गया कि जमीन या संपत्ति गिरवी रखवाने का काम डॉ.बंसल के ही कहने पर होता था। कुछ महीने पहले कोरांव इलाके के एक ही परिवार के दो लोगों का दुर्घटना में घायल होने के बाद इसी हॉस्पिटल में कई दिन तक इलाज हुआ था। बिल बना था करीब दो लाख रुपये। वे बिल चुकाने में असमर्थ थे इसलिए उनकी एक बीघा जमीन डॉ.बंसल के करीबी के नाम गिरवी रखा दी गई। इस बाबत स्टाम्प में लिखापढ़ी की गई थी। इस पहलू पर इसलिए जांच टीम गौर कर रही है कि किसी की जमीन चली जाए या बेघर हो तो वह गुस्से में किसी भी हद तक जा सकता है। यमुनापार और खासतौर से कोरांव के बहुत से लोगों का नक्सलियों से जुड़ाव का पहले भी खुलासा हो चुका है। ऐसे में यह भी एंगल है कि किसी पीड़ित किसान का कोई करीबी शूटर तो ऐसा नहीं कर गया? यह तो साफ है कि शूटर पेशेवर हैं, लेकिन यह भी सच है कि यमुनापार में ऐसे दर्जनों शूटर हैं जो पांच हजार से 50 हजार रुपये में किसी को भी निशाना बनाते रहे हैं।

    डॉक्टर के लोन में फंसे कई कर्मचारी

    डॉ.बंसल के कत्ल ने बहुत से कर्मचारियों को मुश्किल में डाल दिया है। कुछ कर्मचारी तो एसटीएफ के संदेह के घेरे में होने के कारण कई रोज से पूछताछ की मुसीबत झेल ही रहे हैं, मगर स्टाफ के करीब दस लोग ऐसे भी हैं जिनके नाम से डॉक्टर ने बैंकों से लोन लिया था। अब वे हैरान-परेशान हैं। इनमें कुछ कर्मचारियों ने अपनी जमीन या मकान पर लोन लिया था। कुछ का वेतन बढ़ाकर बैंक से कर्ज लिया गया था। डॉ.बंसल द्वारा बैंक लोन की किस्त जमा करा दी जाती थी, मगर अब यह कर्ज कर्मचारियों को चुकता करना होगा। डॉ.बंसल की हत्या के बाद कर्मचारियों के बीच बातचीत से इस बारे में जानकारी मिली।

    गैंगवार के आरोपी का डॉ. बंसल ने महीनों किया था इलाज

    यमुनापार के औद्योगिक क्षेत्र में दो साल पहले जमीन की रंजिश में दो गुटों के  बीच हुए खूनी संघर्ष में गोली से घायल विकास तिवारी को जेल जाने से बचाने के लिए डॉ. बंसल ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। डॉ. बंसल की डॉक्टरी रिपोर्ट का हवाला देकर आरोपी जेल जाने से बचता रहा। दूसरा पक्ष आरोपी को जेल भिजवाने पर आमाद था लेकिन डॉ. बंसल की रिपोर्ट के कारण पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। वह बार-बार रिपोर्ट देते रहे की घायल की हालत बेहद गंभीर है और वह अस्पताल से डिस्चार्ज करने लायक नहीं है। परेशान होकर दूसरा गुट अदालत पहुंचा। अदालत ने डॉ.बंसल को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा था । डॉ. बंसल हत्याकांड के बाद एसटीएफ और क्राइम ब्रांच इस विवाद को भी गहराई से खंगाल रही है।
    दो साल पहले 20 दिसंबर 2015 को औद्योगिक क्षेत्र के ग्राम प्रधान विजय तिवारी शपथ ग्रहण कर लौट रहे थे। तभी प्रापर्टी डीलर संतोष सिंह उर्फ संतू गुट उनकी भिडंत हो गई। दोनों ओर से गोली बारी हुई। इसमें विजय तिवारी और संतोष सिंह की मौत हो गई। गैंगवार में विजय का भाई विकास तिवारी गोली लगने से गंभीर रूप से हआ था। दोनों तरफ से औद्योगिक क्षेत्र में क्रास रिपोर्ट दर्ज हुई। गोली से घायल विकास को जीवन ज्योति अस्पताल मेें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।

    चूंकि विकास भी हत्याकांड में नामजद था इसलिए उसकी गिरफ्तारी वांछित थी। मगर डॉ. बंसल से गहरे ताल्लुक का फायदा उठाकर वह उनके अस्पताल में महीनों इलाज कराता रहा। जबकि दूसरे गुट को डॉ. बंसल की यह करतूत रास नहीं आ रही थी। दूसरे गुट ने अदालत में अर्जी तो अदालत ने डॉ. बंसल को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद विकास तिवारी को जेल जाना पड़ा था।

    रिशेप्सनिस्ट समेत छह लोग एसटीएफ की हिरासत में

    हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. एके बंसल हत्याकांड में सुराग की तलाश में भटक रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने सोमवार को महिला रिशेप्सनिस्ट समेत छह कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया। उन्हें एसटीएफ मुख्यालय ले जाकर पूछताछ की जा रही है। उनके मोबाइल फोन भी चेक किए गए। साथ ही कॉल डिटेल हासिल की जा रही है। एसटीएफ के अफसर मान रहे हैं कि इन कर्मचारियों को कुछ जानकारी जरूर है लेकिन वे बता नहीं रहे हैं।
    बृहस्पतिवार देर शाम करीब सात बजे जीवन ज्योति हॉस्पिटल के ओपीडी चैंबर में डॉ. बंसल को गोलियां मारकर शूटर के भागने के वक्त कम्पाउंडर समेत स्टाफ के तीन लोग शैलेंद्र पाठक, स्वदेश और प्रशांत वहां मौजूद थे। मगर इन तीनों ने ही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच को एक भी अहम जानकारी नहीं दी। शैलेंद्र के सामने ही शूटर ने डॉ. बंसल पर गोलियां दागीं थीं लेकिन उसने पुलिस को बताया कि वह घबराकर फर्श पर बैठ गया था इसलिए कुछ और नहीं देख सका। वह शूटर का हुलिया या कपड़ों के बारे में भी नहीं बता रहा, जो एसटीएफ अफसरों के गले नहीं उतर रहा। वह कहता है कि उसका मोबाइल फोन भी चोरी हो गया।

    ऐसे में उसकी हरकतों पर शक गहराता गया। बाकी दोनों कर्मचारी भी संदेह के घेरे में आए। सोमवार दोपहर क्राइम ब्रांच और एसटीएफ ने शैलेंद्र, संदेश, प्रशांत के साथ ही रिेशेप्सनिस्ट नूरी को पूछताछ की खातिर हिरासत में ले लिया। उन्हें पुलिस लाइन के पास एसटीएफ मुख्यालय ले जाया गया। उनके अलावा सिक्योरिटी गार्ड महेश द्विवेदी और सुपरवाइजर नीरज मिश्रा को भी पूछताछ के बाद कीडगंज थाने ले जाया गया।

    डॉ. बंसल के चैंबर में आने पर उन दोनों को दरवाजे के पास रहना होता है लेकिन घटना के वक्त वे लापता था। महेश ने कहा कि वह 108 नंबर के मरीज अरशद की मृत्यु होने पर शव को घर भिजवाने की व्यवस्था में लगा था। उसने ही एंबुलेंस बुलाई थी, जो पिछले गेट से शूटरों के भागते वक्त सीसीटीवी फुटेज में खड़ी दिखी है। सुपरवाइजर नीरज ने सफाई दी है कि वह वारदात के वक्त 112 नंबर के मरीज कौशलेश का बिल कम कराने के लिए गया था। उसने यह भी कहा कि उसकी ड्यूटी डॉ. बंसल के साथ नहीं थी। उन दोनों के भी बयान से क्राइम ब्रांच और एसटीएफ के अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए, इसलिए उन्हें भी हिरासत में लिया गया है। कुछ और कर्मचारी जांच एजेंसियों के राडार पर हैं, जिन्हें उठाया जा सकता है।

    ‘जीवन ज्योति हॉस्पिटल के इन कर्मचारियों पर शुरू से ही पुलिस और एसटीएफ को संदेह रहा है क्योंकि वे सही बयान नहीं दे रहे हैं। रिशेप्सनिस्ट भी सही जवाब नहीं दे रही थी। इस वजह से अलग-अलग बैठाकर सवाल-जवाब के लिए छह कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है।’
    -विपिन टाडा, एसपी सिटी


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