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    Wednesday, 1 March 2017

    सिंधु घाटी सभ्यता का नाम अब सरस्वती नदी सभ्यता करने का प्रस्ताव

    सिंधु घाटी सभ्यता का नाम अब सरस्वती नदी सभ्यता करने का प्रस्ताव


    हरियाणा विश्व की प्राचीनतम मानव सभ्यता यानी कि सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलने की तैयारी में है। हरियाणा सरकार की संस्था हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड का मानना है कि चूंकि अब सरस्वती नदी का अस्तित्व दुनिया को पता चल चुका है, इसलिए अब सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलकर सरस्वती नदी सभ्यता रखा जाना चाहिए।  अतः यह संस्थान इस संबंध में इससे जुड़ी एक सिफारिश सरकार को भेजने वाली है।
    इससे पहले हरियाणा सरकार ने दिल्ली/एनसीआर के मशहूर शहर गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम रख दिया था। हरियाणा सरकार ने इसी साल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में सरस्वती महोत्सव का आयोजन किया था, इसमें सरस्वती नदी की एतिहासिकता पर चर्चा करने के लिए देश विदेश से पुरातत्ववेता, इतिहासकार और प्रोफेसर आए थे। इस सफल आयोजन के बाद ही सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलने का मन बनाया गया ।
    इससे सात महीने पहले पुरातात्विक खुदाई में सरस्वती नदी के अस्तित्व का पता चल चुका है, और सरकार ने खुदाई के स्थल पर पानी भी छोड़ कर नदी की धारा को पहचानने का काम किया था। बोर्ड के मुताबिक जब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट ये मान चुके हैं कि सरस्वती नदी एक कल्पित कथा नहीं है, और इसका वजूद एक वास्तविकता है तो हमारे देश में इसका नाम सिंधु घाटी सभ्यता से बदलकर सरस्वती नदी सभ्यता रखा जाना चाहिए।
    संस्थान के डिप्टी चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज ने कहा कि, “अब किसी को भी सरस्वती नदी को कपोल कथा नहीं कहनी चाहिए क्योंकि इसका वजूद अब प्रमाणित हो चुका है। प्रशांत भारद्वाज के मुताबिक सरस्वती नदी को अब धार्मिक कथा के तौर पर भी पेश नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा कहकर अब अपनी सभ्यता और विरासत को खुद कम आंकते हैं।
    हरियाणा सरकार के आर्काइव, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग की प्रिंसिपल सेकेट्री सुमिता मिश्रा के मुताबिक, “कई सालों से हडप्पा सभ्यता से जुड़े कई स्थल हरियाणा में पाये गये हैं, इसलिए हरियाणा में सरस्वती नदी की मौजूदगी के प्रमाण मिलने के बाद इसका नाम अब सरस्वती नदी सभ्यता कर देना चाहिए।

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