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    (सम-सामयिक विषयों की मासिक पत्रिका, RNI No.-50756)

    Wednesday, 1 March 2017

    दाल-बाटी और बाटी-चोखा

    दाल-बाटी और बाटी-चोखा
    सम्पूर्ण मध्य भारत के लोकप्रिय, पौष्टिक और कुछ हद तक आज की तरह इंस्टेंट फूड की तरह हर स्थान पर उपलब्ध दाल-बाटी और उत्तर-प्रदेश बिहार के पूर्वाञ्चलीय क्षेत्रों में दाल-बाटी की ही तर्ज़ पर बेहतरीन बाटी-चोखा से मेरा परिचय अधिक पुराना नहीं है।

    दाल-बाटी :
    अस्सी के दशक में जब मैं दिल्ली में शिखर-वार्ता का दिल्ली प्रमुख था तो मेरा अधिकांश समय 200,नॉर्थ एवेन्यू में बीतता था। प्रेसिडेंट एस्टेट से लगे हुए इस संसदीय आवास में उज्जैन से कॉंग्रेस से जीत कर आए श्री सत्यनारायण पँवार का निवास था।
    श्री सत्यनारायण पँवार जी कॉंग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता थे जो श्रीमति गांधी की निर्मम हत्या की सहानुभूति की लहर से उज्जैन से लोकसभा पहुंचे थे। उन्हों ने भाजपा के श्री सत्यनारायण जटिया जी को पराजित किया था।
    उनके इस आवास में उज्जैन के ही एक अन्य कार्यकर्ता श्री गजानन्द वर्मा जी भी रहते थे। मुखी हिस्सा मेरे पास था। पँवार जी यदा-कदा दिल्ली प्रवास के दौरान ही वहाँ रहते थे।
    यहीं हम पत्रकारों की महफिल लगती थी।
    एक दिन पँवार साहब बोले ओझा जी आप ने कभी मालवा का दाल-बाटी चखा है?’
    मैं दिल्ली निवासी, मैंने दाल-बाटी सुना भर था।
    मोटे आटे की बाटी और दाल का स्वाद ही अलग है। कल उज्जैन से कुछ लोग आरहे हैं। नीचे दाल-बाटी बनाने का कार्यक्रम रखते हैं।
    निश्चित दिन पर इस व्यंजन के निर्माण की व्यवस्था फ्लॅट नंबर 199 के आहाते में की गई। लोगों ने गोबर के कंडे का इंतजाम किया, बाटी को भूना, मसालेदार दाल जिसके एक चम्मच ग्रहण करने से नाक से पानी बह निकले।
    दोपहर दो बजे दाल-बाटी परोसी गई। खूब देसी घी में तर कर के।
    मैंने चार बाटी खाईं। इच्छा तो और की थी पर पानी पीते-पीते पेट फूल आया था,सो और नहीं खा पाया। मलाल रह गया।
    तृप्त होगया।
    बाटी-चोखा :
    पिता जी इलाहाबाद में ही सीएमपी डिग्री कॉलेज में पढ़ते थे। उनके मुंह से बाटी-चखा का विवरण तो बहुत सुना था पर खाया कभी नहीं था। इधर जब से नैनी आना-जाना हुआ है,इलाहाबाद से पहचान बनानी शुरू हुई है।
    शहर वैसा ही है। बदला नहीं है।
    इलाहाबाद से निकल कर इलाहाबाद के लोग बदल गए हैं पर इलाहाबाद में रह कर वे ठेठ इलाहाबादी ही हैं।
    बाटी-चोखा केलिए हाई कोर्ट जाता था, अब तो सिविल लाइंस और यहाँ तक कि नैनी में भी अच्छे बाटी-चोखा वाले जाम गए हैं।
    इलाहाबाद में तथाकथित देसी घी में बोर कर (तर करके) चार बाटी 30 रुपए में मिलती है। स्वादिष्ट भी और सुलभ भी।
    गोबर के कंडे पर बनी बाटी और वहीं बैगन-टमाटर को भून कर सरसों के तेल और प्याज़ से तैयार किया चोखा। आप अपने को रोक नहीं पाएंगे।
    और आज के बच्चे हैं पीज़ा और मोमो के मैदे पर मिटे जाते हैं।

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