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    (सम-सामयिक विषयों की मासिक पत्रिका, RNI No.-50756)

    Sunday, 2 April 2017

    रहमान संग में यहाँ,ईसा, नानक, राम


    नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”

    रहमान  संग  में  यहाँ,ईसा,  नानक, राम ।
    वीरों  की जननी यही,भारत इसका नाम ।।

    विश्व पटल पर छाया न्यारा ।
    प्यारा   भारत   देश हमारा ।।

    राणा,   पन्ना,  भामा,  मीरा ।
    यही  हुए  रसखान,कबीरा ।।

    चरक,हलायुध,अब्दुल,भाभा ।
    विश्व पटल की थे यह आभा ।।

    जन्मे  गीत, गजल, कव्वाली ।
    भारत की छवि लगती आली ।।

    क्रिसमस,ईद,लोहड़ी,होली ।
    पावनता  पर्वों   ने    घोली ।।

    अलग - थलग हैं भाषा बोली ।
    पर   माटी  माथे   की   रोली ।।

    इस  माटी  का  लोहा  माना |
    जगत गुरू यह सबने  जाना ||

    मानवता    संग  रहे   वास्ता ।
    सब धर्मों  में अपनी आस्था ।।

    सावन  का  मल्हार  सुहाना ।
    कोयल  नित्य  सुनायें गाना ।।

    भर मन मोद  मोर नित नाचे ।
    नदियाँ,  नाले   भरें  कुलाँचे ।।

    चहुँ दिश ही फैली हरियाली  ।
    इत  झूमें  बरखा   मतवाली ।।

    परियों  वाली  प्रेम  कहानी ।
    यहाँ   सुनाती  दादी, नानी ।।

    कहता  हलधर  बहा  पसीना ।
    श्रम के बल पर हमको जीना ।।

    नीति, रीति  हमने  सिखलाई ।
    सही राह जग को  दिखलाई ।।

    चाँद, सितारे  हम बिन फीके ।
    आव भगत हमसे सब सीखे ।।

    भाषा-बोली है अलग,खान- पान अरु वेश ।
    सब धर्मों  से  है बना,मेरा    भारत    देश ।।

      नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष”
          श्रोत्रिय निवास बयाना

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